बारिश में बर्बाद होता अन्न और केंद्र सरकार के तीन कार्यकाल: दावों और हकीकत के बीच पिसता किसान फाजिल्का / नई दिल्ली: पंजाब के फाजिल्का स्थित अनाज मंडी से सामने आई दिल दहला देने वाली तस्वीरों ने एक बार फिर देश की कृषि व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोल दी है। बेमौसम तेज बारिश के कारण मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा लाखों क्विंटल धान और अनाज पानी में डूब गया । पानी के तेज बहाव में किसानों की महीनों की मेहनत और करोड़ों रुपये का अन्न बहता हुआ साफ नजर आया। इस प्राकृतिक आपदा के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के शासनकाल के तीन कार्यकाल पूरे होते पर किसानों के हितों और अनाज संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक वादे बनाम जमीनी हकीकत नरेन्द्र मोदी सरकार के पिछले बारह वर्षों के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र को लेकर कई बड़े सुधारों और नीतियों के दावे किए गए। सरकार ने अनाज भंडारण और लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण के नाम पर भंडारण के अधिकार और साइलो (Silos) निर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र (Private Sector) की भागीदारी को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े कदम उठाए। ल...
बारिश में बर्बाद होता अन्न और केंद्र सरकार के तीन कार्यकाल: दावों और हकीकत के बीच पिसता किसान फाजिल्का / नई दिल्ली: पंजाब के फाजिल्का स्थित अनाज मंडी से सामने आई दिल दहला देने वाली तस्वीरों ने एक बार फिर देश की कृषि व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोल दी है। बेमौसम तेज बारिश के कारण मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा लाखों क्विंटल धान और अनाज पानी में डूब गया । पानी के तेज बहाव में किसानों की महीनों की मेहनत और करोड़ों रुपये का अन्न बहता हुआ साफ नजर आया। इस प्राकृतिक आपदा के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के शासनकाल के तीन कार्यकाल पूरे होते पर किसानों के हितों और अनाज संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक वादे बनाम जमीनी हकीकत नरेन्द्र मोदी सरकार के पिछले बारह वर्षों के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र को लेकर कई बड़े सुधारों और नीतियों के दावे किए गए। सरकार ने अनाज भंडारण और लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण के नाम पर भंडारण के अधिकार और साइलो (Silos) निर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र (Private Sector) की भागीदारी को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े कदम उठाए। ल...