एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास में कुछ ही कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी अदाकारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपने बेबाक व्यक्तित्व और समाज सेवा के माध्यम से जन-जन के दिल में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पद्म श्री और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्ष) का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण आकस्मिक निधन हो गया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देकर उन्हें बचाने का अंतिम प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजकीय सम्मान के साथ पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। नाना पाटेकर का जाना केवल मनोरंजन जगत की क्षति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे अध्याय का अंत है जिसने सिनेमा को यथार्थ, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'प्रहार' और '...
एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास में कुछ ही कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी अदाकारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपने बेबाक व्यक्तित्व और समाज सेवा के माध्यम से जन-जन के दिल में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पद्म श्री और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्ष) का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण आकस्मिक निधन हो गया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देकर उन्हें बचाने का अंतिम प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजकीय सम्मान के साथ पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। नाना पाटेकर का जाना केवल मनोरंजन जगत की क्षति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे अध्याय का अंत है जिसने सिनेमा को यथार्थ, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'प्रहार' और '...